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Wednesday, 16 September 2015

तो क्या सितंबर में चांद के लाल होते ही तबाह हो जाएगी दुनिया!

न्यूयॉर्क। अमेरिका में इन दिनों सितंबर में चांद के खून की तरह लाल हो जाने और धरती पर भयानक भूकंप के आने की अटकलें लग रही हैं। दरअसल, यहां दो ईसाई संतों ने भविष्यवाणी की है कि धरती सितंबर में नष्ट होने की कगार पर पहुंच जाएगी और इसके लिए चंद्रमा के रंग का लाल होना महज इसकी सूचना देना भर होगा।
दोनों ईसाई संतों का दावा है कि पिछले 18 माह से चंद्रमा का रंग लाल हो रहा है, जो 28 सितंबर को पूरी तरह से लाल हो जाएगा। इसके बाद धरती पर भयानक भूकंप आएंगे, जो जीजस क्राइस्ट के धरती पर आने की सूचना देंगे। ये वो समय होगा, जब धरती पर भयानक भूकंप के झटके होंगे, जो अरब देशों में युद्ध की स्थिति पैदा कर तीसरे विश्वयुद्ध की ओर धकेल देगी।
तो क्या सितंबर में चांद के लाल होते ही तबाह हो जाएगी दुनिया!
अमेरिका में इन दिनों सितंबर में चांद के खून की तरह लाल हो जाने और धरती पर भयानक भूकंप के आने की अटकलें लग रही हैं।
फिलहाल, दोनों को अमेरिकी पुलिस ने अफवाहें फैलाने के आरोप में हिरासत में ले लिया है। दोनों इसाई कैथलिक संतों का दावा है कि चांद के लाल होने की घटना 2000 साल में एक बार होती है। दोनों का नाम मार्क ब्लिज्ट और जॉन हेगी बताया जा रहा है। दोनों का कहना है कि 'ब्लड मून' की स्थिति से इजरायल और यहूदियों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
दोनों का दावा है कि 22 से 28 सितंबर के बीच धरती पूरी तरह से गर्म होती जाएगी, जिसके परिणाम स्वरूप बड़े भूकंप के झटके आएंगे। दोनों का दावा है कि इससे पहले 1948 में जब 'ब्लड मून' की स्थिति बनी थी, तो इजरायल का जन्म हुआ था।
वहीं, 1967 में जब ये स्थिति बनीं, तो इजरायल ने येरूशलम में कब्जा जमाया था। इस बार 28 सितंबर को 'खूनी चांद' धरती पर पैगंबर की वापसी का संकेत देगा। हेगी खुद मेगाचर्चा नाम के संस्था के संस्थापक हैं और 'फोर ब्लड मून्स' नाम की किताब लिख चुके हैं, जो न्यूयॉर्क में बेस्टसेलर रही है।

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